Description
मुुखपृृष्ठ मेंं भाागवत पुुरााण मेंं वर्णि ित वि शााल सर्पप अघाासुुर कोो दिखाायाा गयाा हैै, जोो वृंंदाावन केे बच्चोंं कोो लुुभाानेे केे लि ए अपनेे खुुलेे मुुख कोो एक आकर्षषक गुुफाा काा प्रवेेश द्वाार होोनेे काा कपट करताा हैै। यह रूपक पश्चिमीी शिक्षाा मॉॉडलोंं मेंं छिपेे संंकटोंं कोो उजाागर करताा हैै जोो भाारत मेंं आयाात किए जाा रहेे हैंं और मााताा-पिताा तथाा बच्चोंं कोो समाान रूप सेे लुुभाा रहेे हैंं।पुुस्तक मेंं इन संंकटोंं कोो क्रमाानुुसाार स्पष्ट कियाा गयाा हैै: संंयुुक्त रााष्ट्र केे सतत्् विकाास लक्ष्य (एसडीीजीी 2030) वि श्वव्याापीी रूप सेे शिक्षाा नीीतियोंंकोो प्रभाावि त करनेे केे लि ए वैैश्विकवाादियोंं (ग्लोोबलि स्ट) द्वााराा उपयोोग कियाा जाानेे वाालाा ढांंचाा हैै। इस ढांंचेे मेंं वैैश्विक नाागरिकताा, आनंंद-आधाारि त यौौन शिक्षाा, बच्चोंं केे लि एयौौन अधिकाार, साामााजिक न्यााय, आदि जैैसेे वैैचाारिक काार्ययक्रम सन्निहित हैंं।चीीन और रूस इन वैैश्विक शिक्षाा प्रवृृत्तियोंं कोो आँँख बंंद करकेे नहींं अपनाातेे हैंं, बल्कि अपनेे स्वयंंकेे सभ्यताागत दृष्टिकोोण केे आधाार पर शिक्षाा पर ध्याान केंंद्रित करतेे हैंं।भाारत आलोोचनाात्मक मूूल्यांंकन केे बिनाा पश्चिमीी ढांंचेे काा अंंधाानुुकरण कर रहाा हैै। इसकीी नीीतियांंव्याापक यौौन शिक्षाा (सीीएसई), साामााजिक भाावनाात्मक शिक्षाा (एसईएल), औरवैैश्विक नाागरिकताा शिक्षाा (जीीसीीई) मेंं निर्मि ित पश्चिमीी वि चाारधाारााओं कोो अपनाा रहीी हैंं।संंयुुक्त रााष्ट्र, गैैर-सरकाारीी संंगठनोंं और साार्ववजनिक-निजीी भाागीीदाारीी नेे इन वि चाारधाारााओं कोो भाारतीीय शिक्षाा मेंं लाागूू कियाा हैै। अकाादमिक कठोोरताा और पाारंंपरिक मूूल्योंं केे स्थाानपर वैैचाारिक मत-आरोोपण कोो प्रााथमिकताा दीी जाा रहीी हैै।यह पुुस्तक भाारतीीय नीीति निर्माातााओं कोो अमेेरिकाा मेंं केे -12 शैैक्षिक प्रणाालीी कीी विफलताा काा अध्ययन करनेे केे लि ए बााध्य करतीी हैै तााकि वेे अमेेरिकीी शिक्षाा मॉॉडलोंं कोो यहाँँदोोहराानेे केे वि रुद्ध सचेेत होंं।रााष्ट्रीीय शिक्षाा नीीति (एनईपीी) 2020 भाारत कीी अनूूठीी आवश्यकतााओं कोो संंबोोधित करनेे कीी बजााय एसडीीजीी केे सााथ संंरेेखि त करनेे केे प्रयाास मेंं लगीी हुई हैै। इस पुस्तक का उदद्शे य् भारतीय शिकषक् ों को विदशे ी दबाव का विर
