Description
आध्यात्मिक यात्रा तब शुरू होती है जब व्यक्ति बाहरी उपार्जन से मुख मोड़कर आंतरिक अन्वेषण की ओर मुड़ता है।संसार में नारी-पुरुष समान हैं। वेद उल्लेख करते हैं कि कैसे ऋषिकाओं ने ऋषियों के साथ अध्ययन किया तथा मंत्रों की रचना की।केवल इश्वर ही सत्य है। संसार उनकी शक्ति या माया का खेल है, और पूर्ण नहीं है। पूर्णता केवल इश्वर में है।
