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Dusky's Shrine  |  SKU: 9789362057136
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Billesur Bakariha (बिल्लेसुर बकरिहा)

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Description

पश्चिम बंगाल के मेदनापुर जिले में 21 फरवरी 1896 को निराला का जन्म हुआ, हालांकि वर्ष को लेकर मतभेद है, किंतु तारीख एक मानी जाती रही है। सूर्यकांत त्रिपाठी निराला एक ऐसे साहित्यकार रहे हैं, जिन्होंने पूर्ववर्ती परिपाटी से उलट आगे का दृष्टिकोण अपनाया। छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं- जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और महादेवी वर्मा। क्या कमाल की बात है कि निराला ने 1920 के आसपास अपना लेखन कार्य आरंभ किया पहली रचना जन्मभूमि पर लिखा गया एक गीत था, इससे पहले जूही की काली 1916 में लिख चुके थे, किंतु इसका प्रकाशन 1921 में प्रथम बार हुआ। साहस और सजकता उन्हें तत्कालीन समय में विशिष्ट लेखक बनाती है। खड़ी बोली पर पूर्ण अधिकार के चलते उनके उपन्यासों ने भी उतनी ही धूम मचाई जीतने की कविताओं ने। छायावादी युग के प्रमुख लेखक होने के बावजूद उनकी लेखनी यथार्थ के अधिक निकट है। 15 अक्टूबर 1961 को इस अद्वितीय प्रतिभा ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन आश्चर्य की बात देखिए अपनी अंतिम कविता "अभी ना होगा मेरा अंत" से जनमानस को हमेशा उनके पास बने रहने का संदेश भी दे गए।

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