{"product_id":"karna-surya-putra-part-2","title":"Karna: Surya Putra (Part 2)","description":"\u003cp\u003eभाग 2कर्णसूर्य पुत्रकेविन मिसलअंग नरेश कर्ण एक निकट जन के हाल ही में हुए निधन से त्रस्त है। और मोक्ष पाने के लिए उन्हें ही चोट पहुँचाना चाहता है जो उसके निकटतम हैं।सत्यसेन, कर्ण का पहला पुत्र। वह अपने पिता की लोकप्रियता के आगे कहीं नहीं ठहरता परंतु ऐसा करने का प्रयत्न अवश्य करता है। वह श्रेष्ठ बनने की चाह में सब कुछ खोने को तैयार है।शनाया अंग देश की महारानी, अपने पति की अनुपस्थिति में अंग देश के सिंहासन पर बैठती है परंतु कुछ नैतिक कर्तव्य उसके अतीत का सामना करने लगे हैं और संभवतः उसके वर्तमान को छल रहे हैं।वृषकेतु, कर्ण का दूसरा पुत्र पांडवों तथा कौरवों के साथ निष्ठा बदल रहा है और अपने पिता और उनके सिंहासन के पतन के षड़यंत्र रच रहा है परंतु एक नए विकर्षण के चलते उचित और अनुचित की रेखा धुंधलाने लगती है। कभी एक स्नेहिल परिवार, अब षड़यंत्रकारियों] हत्यारों और पीठ पीछे वार करने वालों से घिरा है। क्या वे जीवित रह पाएँगे?उन्हें इस बात का अंदाज़ा तक नहीं- जाग उठी है एक पुरातन बुराई, जो उनके देश की जड़ों को विषाक्त करने तथा कर्ण के अस्तित्व को संकट में डालने को तत्पर है।\u003c\/p\u003e","brand":"Dusky's Shrine","offers":[{"title":"Paperback","offer_id":46035766247481,"sku":"9789390343676","price":315.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0795\/3367\/0457\/files\/81HBKaGZkpL._SL1500.jpg?v=1782813744","url":"https:\/\/duskysshrine.com\/products\/karna-surya-putra-part-2","provider":"Dusky's Shrine","version":"1.0","type":"link"}